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दरबारों को सलामी ठोकने में व्यस्त अख़बार भूल गए,की जिनकी वजह से उन्हें अभिव्यक्ति की आज़ादी का अधिकार मिला,आज उस भगत सिंह को याद किया जा सकता था।मगर अफ़सोस! टेलीविजन के डिब्बे आज भी सनी लियोन की लिपस्टिक का वजन तोलने में लगे हुए है। आज के अख़बारों में भी समस्त पार्टियों के राजनेताओं के विज्ञापन बड़े बड़े पन्नो पर छपे है,जिसमे उन्होंने अपनी ही शान में कसीदे पढ़े हुए है,पर सत्ता के नशे में चूर पाखण्डी नेता अपनी-अपनी कुर्सियां बचाने में लगे हुए है।नेताओ ने एक कोने में भी भगतसिंह... का नाम आज भी लिखना उचित नहीं समझा।
65 साल के कांग्रेसी राज में आपने नेहरु के नाम की स्कूल ,इंदिरा गाँधी के नाम की नहरे और सड़के ,राजीव गाँधी के नाम की पाठशालाएं भी देखी होगी।पर भगत सिंह,उधम सिंह,वीर सावरकर,चंद्रशेखर आज़ाद के बलिदान को अहिंसा की चादर से ढकने में कोई कसर नहीं छोड़ी।कांग्रेस ने मुसलमानों को बेवकूफ बनाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी।इस देश के लिए आज़ादी की लड़ाई लड़ने वाले अशफाक उल्लाह खां,छाती पर तोप के गोले झेलने वाले अब्दुल हमीद, के नाम की,न कोई स्कूल,न सड़क,न नहर,ना ही इतिहास की किताबे।

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"गांधी तुम भगत सिंह की फांसी रुकवा सकते थे" जब ये ख्याल दिल में आता है भगत सिंह तेरा सम्मान और भी बढ जाता है !!
था महीना मार्च का तारीख थी तेइसवीं। सात बजते ही वतन का गुल सितारा हो गया। ये मुल्क मेरा उसी दिन बेसहारा हो गया !!

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तीन युवा परिंदे उड़े तो आसमान रो पड़ा। वो हँस रहे थे मगर,हिन्दुस्तान रो पड़ा।। जिए तो खूब जिए और मरे तो खूब मरे। महाविदाई पर सतलुज का श्मशान रो पड़ा।। गर्दनों के गुलाबो ने किया माँ का अभिषेक। ओज भरी बलिदानी पर सारा हिन्दुस्तान रो पड़ा। इंसानो को तो रोना ही था बहुत मगर,बड़े भाइयो के थमने पर तूफान रो पड़ा।। भगत ,सुखदेव,राजगुरु दिलो में है "बजरंगी" । 23 मार्च को अखिल भारत महान रो पड़ा ।।। तीन युवा परिंदे उड़े तो आसमान रो पड़ा।।
23 मार्च शहीद दिवस पर शत शत नमन

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Sharad Yadav, who is at present in Gujarat to campaign against the BJP, is expected to respond to his disqualification tomorrow.
indianexpress.com

हथकड़ियों से जकड़े हाँथ जब इंकलाब करते थे,
तख़्त-ए-लंदन तक गोरे...थर थर कांपा करते थे !!
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आजादी के बाद जितना सम्मान महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू को मिला, क्या भगत सिंह को भी मिला? कमेंट कर बताएं अपनी राय.

क्या हुआ जो तू गुलाबी हरे नोटों में नहीं है,
तू हर भारतवासी के दिल में बसता है "भगत सिंह

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तीन युवा परिंदे उड़े तो आसमान रो पड़ा। वो हँस रहे थे मगर,हिन्दुस्तान रो पड़ा।। जिए तो खूब जिए और मरे तो खूब मरे। महाविदाई पर सतलुज का श्मशान रो पड़ा।। गर्दनों के गुलाबो ने किया माँ का अभिषेक। ओज भरी बलिदानी पर सारा हिन्दुस्तान रो पड़ा। इंसानो को तो रोना ही था बहुत मगर,बड़े भाइयो के थमने पर तूफान रो पड़ा।। भगत ,सुखदेव,राजगुरु दिलो में है "बजरंगी" । 23 मार्च को अखिल भारत महान रो पड़ा ।।। तीन युवा परिंदे उड़े तो आसमान रो पड़ा।।
23 मार्च शहीद दिवस पर शत शत नमन
जय हिन्द

चूमना पड़ता है ” फांसी का फंदा ” ….

चरखा चलाने से कभी ” इंकलाब ” नहीं मिलता

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खून अभी वो ही है ना ही शोक बदले ना ही जूनून, सून लो फिर से, रियासते गयी है रूतबा नही, रौब ओर खोफ आज भी वही हें