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"Swaraj is my birthright, and I shall have it!"
Our tributes to Lokmanya Bal Gangadhar Tilak on his death anniversary on Ist August.

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Lahore Conspiracy Case (1928-1929),
Indian Freedom Movement

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The Great Indian Freedom Fighters updated their cover photo.
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Sukhdev was a famous Indian revolutionary who played a major role in the India's struggle for Independence. He is amongst those great Indian freedom fighters who sacrificed their lives for the freedom of their country.His full name is Sukhdev Thapar and he was born on 15th May, 1907.

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Born in Bihar - Proud of Bihar

April 23rd 2011 the occasion of "BABU VEER KUNWAR SINGH JAYANTI ".

बिहार के आरा ज़िले में जगदीशपुर से ही कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह ने विद्रोह का नेतृत्व ...किया था और विद्रोह को पूर्वांचल तक प्रभावी बनाया था.

In the year 1972, the Govt. of Bihar declared the paternal residence of Babu Kunwar Singh as the Babu Kunwar Singh Smriti Sangrahalaya at Jagdishpur (Bhojpur) with the view to commemorate the first war of independence of 1857. Under the financial assistance of the 11th Finance Commission, the plan to develop this museum as a martyrium of freedom struggle is in progress.

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The Great Indian Freedom Fighters added 3 new photos to the album: Amar Shaheed.

23 मार्च 1931 को शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु ने माँ भारती के चरणों में अपना जीवन बलिदान कर दिया था। इनके 80 वें पुण्यतिथि पर शत-शत नमन, इस राष्ट्र के निर्माण में इनका का योगदान सदा अविस्मरणीय रहेगा।

महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती आधुनिक भारत के महान चिंतक, सुधारक, देशभक्त थे। महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती जी का जन्म १८२४ में बंबई की मोरवी रियासत के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। इनका बचपन का नाम मूलशंकर था। गृह त्याग के बाद मथुरा में स्वामी विरजानंद के शिष्य बने। १८६३ में शिक्षा प्राप्त कर गुरु की आज्ञा से धर्म सुधार हेतु 'पाखण्ड खण्डिनी पताका' फहराई। स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने ७ अप्रैल १८७५ को बंबई में आर्य समाज की स्थापना की थी। इन्होंने वेदों की ओर लौटो तथा भारत भ...ारतीयों के लिए नारे दिए। स्वामी दयानंद ने सत्यार्थ प्रकाश ( हिंदी भाषा में) तथा वेदभाष्यों की रचना की। इन्होंने धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों को पुन: हिंदू बनाने के लिएशुद्धि आंदोलन चलाया। महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती जी ने तत्कालीन समाज में व्याप्त सामाजिक कुरीतियों तथा अंधविश्वासों और रूढियों-बुराइयों को दूर करने के लिए, निर्भय होकर उन पर आक्रमण किया। वे संन्यासी योद्धा कहलाए। उन्होंने जन्मना जाति का विरोध किया तथा कर्म के आधार वेदानुकूल वर्ण-निर्धारण की बात कही। वे दलितोद्धार के पक्षधर थे। उन्होंने स्त्रियों की शिक्षा के लिए प्रबल आंदोलन चलाया। उन्होंने बाल विवाह तथा सती प्रथा का निषेध किया तथा विधवा विवाह का समर्थन किया। उन्होंने ईश्वर को ब्रह्मांड का निमित्त कारण तथा प्रकृति को अनादि तथा शाश्वत माना। वे तैत्रवाद के समर्थक थे। उनके दार्शनिक विचार वेदानुकूल थे। १८८३ में स्वामी जी का देहांत हो गया

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"मैं नहीं चाहता कि मेरे घर के सभी दरवाजे और खिड़कियां बंद हों। मैं एक ऐसा घर चाहता हूं जिसकी सभी खिड़कियां और दरवाजे खुले हों, जिसमें हर भूमि और राष्‍ट्र की सांस्‍कृतिक पवन होकर गुजरे।" - महात्‍मा गांधी

दुनिया उन्हें महात्मा गांधी और बापू के नाम से भी जानती है। वे देश की ‌‌‌आज़ादी के लिए जेल गए, ब्रिटिश सरकार के खिलाफ मुहिम चलाई, चरखे पर सूत काता और... खादी ‌‌‌पहनी। ‌‌‌उन्होंने न तो कभी हिंसक हथियार का सहारा लिया और न ही झूठ-फरेब का। उन्होंने देश की नींव सत्य और अहिंसा के मजबूत पत्थरों ‌‌‌से रखी। उन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ सत्याग्रह, असहयोग, दांडी मार्च, भारत छोड़ो आंदोलन चलाया और अपने लक्ष्य में कामयाब हुए और ब्रिटिश सरकार भारत से पलायन को मजबूर हो गई।

उनके पुण्यतिथि पर उनको शत शत नमन ..........


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भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन के एक अप्रतिम महानायक , महान समाज सुधारक  'पंजाब केसरी' श्री लाला लाजपत राय जी को उनके 146वें जन्मदिवस पर शत-शत नमन, इस राष्ट्र के निर्माण में लाला जी का योगदान सदा अविस्मरणीय रहेगा।

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HAPPY REPUBLIC DAY 2011
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें

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भारत के स्वाधीनता संग्राम में सन् 1911 से लेकर 21 जनवरी 1945 तक,जब तक
janokti.com

Salute to our real leader and freedom fighter on 11th January his punyatithi.

Lal Bahadur Shrivastav Shastri added 12 new photos to the album: Lal Bahadur Shastri, 2nd PM of India. — with Abhishek Raj and 42 others.

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हम अपने दिवंगत प्रधानमंत्री और महान स्वतन्त्रता सेनानी श्री लाल बहादुर शास्त्री जी को उनके पुण्यतिथि (11 जनबरी) के अबसर पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

शहीद मदनलाल धिंग्रा
एक सिविल सर्जन के बेटे, अमृतसर के सुखसुविधा से संपन्न परिवार में जन्म लेकर क्रांतिवीर बनने तक का सफ़र लंदन में शुरु हुआ जब मदनलाल लंदन के युनिवर्सिटी कॊलेज से सिविल इन्जिनीयरिंग में डि़प्लोमा कर रहे थे.सन १९०५ के आसपास का समय था.वहां के इंडिया हाउस में युवावस्था के रंगीन मस्ती भरी शामें बिताने जाया करते थे मदनलाल.रोमांटिक गाने,मित्रों के बीच सपनों की दीवानी दुनिया की चुहुलबाज़ी, बौद्धिक बहसें आदि दिनचर्या थी.देशभक्ति की भावना का दूर दूर तक पता नहीं था.

उन द...िनों साथी क्रांतिकारीयों के साथ सावरकरजी की बम बनाने और अन्य शस्त्रों को हासिल करने की कोशिशें चल रही थी तो मदनलाल भी उनके संपर्क में आये, और वहां से उनके जीवन धारा में एक रेडिकल बदलाव आया, और वे भी शामिल हो गये इस आज़ादी की लढाई में.

उसके बाद उन्होने लोर्ड कर्ज़न वाईसरॊय का कत्ल करने की कोशिश की, मगर वह दो बार बच गया.बंगाल के पूर्व गवर्नर ब्रॆमफ़िल्ड फ़ुल्लर को मारने की योजना भी नाकाम रही क्योंकि मदनलाजी वहां लेट पहुंचे. फ़िर उन्होने कर्ज़न वाईली को मारने का निश्चय किया.जिस मीटिंग में योजना बनाई गयी उसमें बिपिनचंद्र पाल भी मौजूद थे. सावरकर नें कठोरता से मदनलाल को कहा कि अगर सफ़ल होकर नही आये तो कभी भी मुंह नही दिखाना.

१ जुलाई १००९ को रात को मदनलाल वाईली से मिले और उनसे कुछ खास बात करने के बहाने उनके समीप पहुंचे .११ बजकर २० मिनीट पर उन्होने जेब से कोल्ट पिस्टल निकाल कर कर्ज़न वाईली पर करीब से दो गोलीयां चलाई, जिससे वह जगह पर ही ढेर हो गया.ये देखकर एक पारसी डॊक्टर कावसजी लालकाका उसे बचाने दौडा तो उस पर भी गोली चलाई , और खुद पर भी चलाने ही वाले थे कि उन्हे पकड लिया गया.

उन्हे पकड कर जब मेजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया तो उन्होनें शान से कहा कि मैं आपका कानून नहीं मानता. जिस तरह से जर्मन लोगों का ब्रिटेन पर राज करने का कोई अधिकार नहीं वैसे ही आप लोगो को भी हम पर राज करने का अधिकार कैसे हो सकता है?

१७ अगस्त १९०९ को याने आज से सौ साल पहले सुबह पेण्टोविले की जेल में फ़ांसी पर चढाया गया.यह वही जेल है, जहां १९४० में भारत माता के एक और लाडले सपूत शईद उधमसिंग को भी फ़ांसी पर चढा़या गया था.

दुर्भाग्य से इस देशभक्त के पार्थिव शरीर को वापस नहीं दिया गया और इसी जेल में दफ़ना दिया गया.

बाद में सन १२ डिसेंबर १९७६ को भारत सरकार के प्रयत्नों के कारण उनके पार्थिव शरीर लिये हुए शवपेटी को भारत लाया गया, और जीते जी तो नही , मगर फ़ांसी के कई सालों के बाद शहीद मदनलाल धिंग्रा के पार्थिव शरीर को अपने स्वतंत्र देश की मिट्टी नसीब हुई.

ऐसे शूर और वतन पर मर मिटने वाले जांबाज़ मदनलाल धिंग्रा की पावन आत्मा को मेरा नमन.......


Written by दिलीप कवठेकर
source : http://amoghkawathekar.blogspot.com/2009/…/blog-post_17.html

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Freedom Fighters of india,Motilal Nehru was an early Indian freedom fighter and leader of the Indian National Congress. He was also the patriarch of India's most powerful political family
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