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SERVE FOR THE PEOPLE...!!
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JAI HIND...!!!!

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Lets show the real face of land of terrorists.

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Raksha Mera Dharma.

Jai Maa Bharati

Veer Bhogya Vasundhara

|| वन्दे मातरम् ||

"Nischey Kar Apni Jeet Karu"

"I Fight For Sure To Win"

फर्रुखाबाद, 21 फरवरीः राजपूत रेजीमेंट के 91 वें स्थापना दिवस के अवसर पर सोमवार को ब्रिगेडियर बी पी चंद्रन ने अमर जवान ज्योति पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांञलि भेंट की।
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The Rajput Regiment added 53 new photos to the album: The Rajput Regiment.

मै राजपूत मै राजपूत
मै बलिदानों का हूँ प्रतिक मै भारत माता का सपूत !
मै राजपूत मै राजपूत !!
मैने धरती के कागज पर असिधाराओ से लिखे लेख !
मैने अम्बर को लाल किया प्राची में उषाकाल देख !!...
सूर्य चन्द्र की अग्नि में पूरित हें महातेज !
में सृष्टि के अवसान काल की विकट थिरकती प्रलय रेख !!
में महा ध्वंश का प्यासा भैरव महाकाल का अग्रदूत !
मै राजपूत मै राजपूत !!

मैने ब्रह्मा की शंख ध्वनि से धर्म और संस्कृति को सिखा !
भगवन विष्णु के प्रखर चक्र से वज्र कठोरता को सिखा !!
मैने प्रलयन्कर शिव से सिखा महा विनाश का मूल मंत्र !!
दानव राहू केतु से मैने अमर मृत्यु को है सिखा !!
बालक ध्रुव से अटल साधना ऋषियों से विध्या परमपुत !
मै राजपूत मै राजपूत !!

मेरे जौहर और शको से यमराज यहाँ खा गए मात !
जब कभी जली शमाँ तभी निज को कर दिया भष्मसात !!
सोमनाथ खानवा और हल्दीघाटी रणत भंवर में !
झुका जहाँ पर वहां वहां एक के लाख हाँथ !!
चित्तोड्दुर्ग से जीर्ण दुर्ग देते मेरे व्रत का सबूत !
मै राजपूत मै राजपूत !!

तुम जागीरो के गुर्गे यह शब्द कहा से आता है !
मेरे तो कानो में जब दुर्बल का रोदन जाता है !!
बस तड़फ शिराएँ उठती है मेरे दिल की तड़क तड़क !
फिर नही तोलता हानि लाभ कर्त्तव्य याद आ जाता है !!
जब मानवता के त्राण हेतु मैं रक्त बहत हूँ प्रभूत !
मै राजपूत मै राजपूत !!

बौखला उठा लंका सागर जब मेरे धनु पर तीर चढ़ा !
बन साधक मैने ताप किया झुक पड़ी विष्णु की गंगधारा !!
बैरी पर मेरी खडग उठी तब कांप उठी पाताल धरा !
बर्फीला काबुल पिघल गया मेरी भृकुटी थी प्रलयकार !!
बाबर के प्याले टूट पड़े बोले जय तेरी राजपूत !
मै राजपूत मै राजपूत !!

मैं महाशक्ति का ज्येष्ठ पुत्र शक्ति का सद उपयोग किया !
कब सिकंदर का बल के मद से इतराकर अनुकरण किया !!
भारत लुटा उसी वंश के गौरी को भी माफ़ किया !
दुर्बल विजितो पर कब नादिर बन मैने कत्ले आम किया !!
मैं दिव्य गुणों से ओत प्रोत में अजय वीर में देवदूत !
मै राजपूत मै राजपूत !!

फिर से शक्ति के मंदिर मैं नित पुष्प चढाने जाता हूँ !
निज शरीर की लोह कड़ी फौलादी करने जाता हूँ !!
वज्र कड़ी से मिला कड़ी दीप दीप से जला जला कार !
नए मार्ग से जीवन का इतिहास बनाने जाता हूँ !
कठिनाई आवे टूट पडूँगा राजपूत हूँ राजपूत !!
मै राजपूत मै राजपूत !!

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स्वधर्ममपि चावेक्ष्य न विकम्पितुमर्हसि
धर्म्याद्धि युद्धाच्छ्रेयोऽन्यत्क्षत्रियस्य न विद्यते ॥

Considering also your duty as a warrior, You should not waver.
Because there is nothing more auspicious, For a warrior than a righteous war.

रण खेती रजपूत री, कबहू न पीठ धरेह !
देश रुखाले आपणे, दुखिया पीड़ हरे !!

Bharat Mata Ki Jai

“Considering your specific duty as a kshatriya, you should know that there is no better engagement for you than fighting on religious principles; and so there is no need for hesitation. O Partha, happy are the kshatriyas to whom such fighting opportunities come unsought, opening for them the doors of the heavenly planets.” (Lord Krishna, Bhagavad-gita, 2.31-32)

Veer Bhogya Vasundhara

||Bharat Mata Ki Jai||