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“Greetings to fellow citizens, especially to our Jain community, on Mahavir Jayanti. The teachings of Lord Mahavira are relevant and significant to this day. Let us draw inspiration from his life to spread love and harmony in the world #PresidentKovind”
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#MahaviraJanmKalyanak

Every atom in this universe is independent , there is no preserver , nor an owner of this universe. Neither a creator nor a destroyer. No external judge. Only i take responsibility for my actions and their consequences. The smallest of creatures have a life- force just like mine.
- Thirthankar Mahavira

...

सभी धर्म बंधुओं को भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक महोत्सव की बहुत बहुत शुभकामनाएँ 🙏🙏🙏

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Jain Dharohar page is dedicated to all the Ancient and Current Heritages belongs to Jainism...

https://economictimes.indiatimes.com/…/slidesh…/62980782.cms

This is amazing n speechless....

गोम्मटेस थुदि

...

विसट्टकंदोटट्दलाणुयारं,
सुलोयणं चंदसमाणतुंडं।
घोणाजियं चंपयपुप्फसोहं,
तं गोम्मटेसं पणमामि णिच्चं॥१॥

अच्छायसच्छं जलकंतगंडं,
आबाहुदोलंतसुकण्णपासं।
गइंदसुंडुज्जलबाहुदंडं,
तं गोम्मटेसं पणमामि णिच्चं॥॥

सुकंठसोहाजियदिव्वसंखं।
हिमालयुद्दामविसालकंधं।
सुपेक्खणिज्जायलसुट्ठुमज्झं,
तं गोम्मटेसं पणमामि णिच्चं॥३॥

विंझायलग्गे पविभासमाणं,
सिहामणिं सव्वसुचेदियाणं।
तिलोयसंतोसयपुण्णचंदं,
तं गोम्मटेसं पणमामि णिच्चं॥४॥

लयासमक्कंतमहासरीरं,
भव्वावलीलद्धसुकप्परुक्खं।
देविंदविंदच्चियपायपोम्मं,
तं गोम्मटेसं पणमामि णिच्चं॥५॥

दियंबरो जो ण य भीइजुत्तो,
ण चांबरे सत्तमणो विसुद्धो।
सप्पादिजंतुप्फुसदो ण कंपो,
तं गोम्मटेसं पणमामि णिच्चं॥६॥

आसं ण जो पेक्खदि सच्छदिट्ठि-
सोक्खे ण वंछा हयदोसमूलं।
विरायभावं भरहे विसल्लं,
तं गोम्मटेसं पणमामि णिच्चं॥७॥

उपाहिमुत्तं धणधामवज्जं,
सुसम्मजुत्तं मयमोहहारं।
वस्सेयपज्जंतुववासजुत्तं,
तं गोम्मटेसं पणमामि णिच्चं॥८॥

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Jain Dharohar(जैन धरोहर) updated their cover photo.
February 14
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Jains Today is with Hetal Shah and 17 others.

Best Documentary on Gomateshwar Bahubali, Shravanbelagola (Hindi, 16.11 Minutes)
Created by- Raj Khatri Filmz

Directed by- Ritankar Nandy
Creative Head- Shantan...u kelkar
Written by- Gaurav khare, Shantanu Kelkar, Naveen Tyagi
Cinematographer- Kavish Agrawal
Editor- Mohit Jain
Illustrations- Amol Thakur
Animator- Asheen Anoop, Anaroop karketta
Voice Over- Vikrant
Background Score- Rupesh Kumar Ram, Sundeep Gosswami
Sound Engineer- Supavitra Mehrotra

#Jainism #Bahubali #Gomateshwara #Shravanabelagola #IndiaTourism

Artist- Kalliroi Tziafeta

Line Production- Vrindh Films
Production Controller- Govind Verma
Local Coordinator- Dashavara Chandru
Chartered Accountant- Gaurav Dasani
Accounts Head- Mukhtar Hussain Chaudhary

First AD- Aashish Khandelwal
Second AD- Mohit Jain
Costume- Shweta Satpathy
Hair Dresser- Bharti
Drone Operator- Anant, Hemant
DI Artist- Inigo (Lucia Studios)
Camera Assistant- Suresh Reddy
Drone Assistant- Babu Rob
Light Supplier- Manju Cine Services
Light Boys- Naveen, Naga, Pani, Shyam
Driver- Girish & Munna
Spot Boy- Sangappa

Creative Producer- Amitabh Chandra
Production Executive- Zeeshan Hussain
Project Head- Pallavi Chaddha

Presented By- Raj Khatri
Produced by- SDJMC Trust, Shravanabelagola

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Mahamasthakabhisheka

Mahamasthakabhisheka Exhibtion - MMC EXPO - 2018
Last Date to apply for stalls in exhibtion is 15th January 2018
Visit this link to apply for stalls - http://ww...w.mmcexpo2018.com/…/application-for-stalls-pavili…/
For further details of the exhibition visit - www.mmcexpo2018.com
For further details of Mahamasthakabhisheka visit - www.mahamasthakabhisheka.com
#MMCEXPO2018 #Mahamasthakabhisheka #Mahamastakabhisheka #Bahubali #Gomateshwara #Hassan #Shravanabelagola #Sravanabelagola #Exhibition

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Posted by Dainik Bhaskar
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Dainik Bhaskar

Video: यहां गुफा में छिपा मिला 844 साल पुराना राज, रहस्य बनी ये जगह

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Jainglory

कोलुहा पहाड़ (चतरा जिला, झारखण्ड) - दुखद घटना
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कोल्हुआ पहाड़ क्षेत्र गया (बिहार) से ३८ मील दूर है,जो ...चतरा के समीप पड़ता है,इसे आजकल भोदल,भट्टलपुर भी कहते है |

कल जैन समाज के अतिप्राचीन सिद्धक्षेत्र तीर्थ क्षेत्र और आदिवासी, हिन्दू समाज के आस्था के केंद्र कोलुहा पहाड़ (चतरा जिला, झारखण्ड) में स्थित गुफा वाले पार्श्वनाथ भगवान की अतिप्राचीन प्राचीन प्रतिमा जी को ध्वस्त कर दिया | असामाजिक तत्वों ने मूर्ति का सिर अलग कर दिया और टूकड़े करके अलग-अलग स्थान पर फेंक दिया | या फिर ये मूर्ती तस्करों का कारनामा रहा हो और मात्र सिर चुराकर ले गए हो | प्रतिमा जी अपने मूल स्थान से काफी दूर जमीन पर पड़ी पायी गयी है | तुरंत पुलिस को खबर की गयी और प्रशासन, तथा सरकार को हरकत में लाया गया |

इस दुखद घटना के बाद से ही न सिर्फ जैन बल्कि अन्य समुदाय के लोगो में भी आक्रोश व्याप्त है | आस पास के शहरो और ग्रामो के जैन अजैन लोगो ने भी फ़ोन करके पुलिस और प्रशासन पर दबाव बनाया है, सरकार ने सी आई डी जांच की अनुशंसा कर दी है | प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्रतिमा जी का सिर अभी तक नहीं मिल पाया है और शायद पहाड़ के तालाब में या कही और फेक दिया गया है जो शायद दो या अधिक टुकड़ो में भी हो सकता है | या फिर ये मूर्ती तस्करों का कारनामा रहा हो और मात्र सिर चुराकर ले गए हो | अभी तक कुछ सामने नहीं आ पाया है, न ही कोई गिरफ्तारी हुई है |

कुछ महीनो पहले छत्तीसगढ़ में स्थित ढोलकल की प्राचीन गणेश प्रतिमा को भी असामाजिक या माओ नक्सल लोगो ने इसी प्रकार पहाड़ से नीचे फेक दिया गया था और प्रतिमा के कई टुकड़े हो गए थे | तब पुरातत्व प्रेमियों, इतिहासकारो, और सामान्य जन ने भी मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से पुलिस, प्रशासन और सरकार पर दबाव बनाकर प्रतिमा के हिस्सों को ढूंढकर पुनः जुड़वाया था और प्रतिमा पुनः मूल स्थल पर स्थापित की गयी थी | इस मामले में भी वैसी ही सजगता और सहयोग अपेक्षित है |

कोलुहा पहाड़ का महत्व
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जैन समाज के अतिप्राचीन सिद्धक्षेत्र तीर्थ क्षेत्र कोल्हुआ पहाड़ जी जहाँ संभवतः भगवान शीतलनाथ के तप और ज्ञान कल्याणक सम्पन्न हुए थे और जो इतिहास में भद्लिलपुर नाम से प्रसिद्ध है | कुछ प्रसिद्ध इतिहासकारों ने इस पर्वत की प्राचीनता का आकलन करके इसे कोटिशिला सिद्धक्षेत्र कहा है, उक्त पहाड़ सम्मेदशिखर पहाड़ का आद्य छोर माना जाता है, जहाँ के प्राचीन गुफाग्रहों में तीर्थंकरों की प्रतिमाएँ शिलाओं पर उकेरी गई है जो इसकी प्राचीनता इंगित करती है | सर विलियम हंटर डॉक्टर स्टेन जैसे पुरातत्वविदों ने इसे जैन सिद्धक्षेत्र प्रमाणित किया है और बहुत पुराना स्थान बताया है। इसके अतिरिक्त आदिवासी और अन्य ग्रामीण लोग भी इस प्रतिमा जी को भैरव बाबा मानकर पूजते थे |

अब क्या ?
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अब भी चेते अपने तीर्थक्षेत्रों की सुरक्षा करे अन्यथा यूँ ही बड़े प्राचीन क्षेत्रों से ऐसी घटनाएँ सामने आती रहेगी दो वर्ष पूर्व लिच्छवाड़ में भगवान महावीर की अतिप्राचीन प्रतिमा की चोरी हुई थी उसके बाद क्षेत्र में यह दूसरी सबसे बड़ी घटना है |

१. कृपया आप ईमेल या पत्र लिखकर या फ़ोन करके झारखण्ड सरकार, चतरा जिला प्रशासन को इस बारे में अति त्वरित कार्यवाही का दबाव बनाये रखे जब तक कि दोषियों की गिरफ़्तारी नहीं हो जाती और प्रतिमा जी का सिर नहीं मिल जाता | यदि कहीं पर भी ढिलाई या लापरवाही या बदनीयती अनुभव होती है, आस पास के सभी शहरो (रांची, गया, हज़ारीबाग़, चतरा, इटखोरी, हंटरगंज, धनबाद, जमशेदपुर इत्यादि ) के जैन, हिन्दू तथा अन्य लोग तुरंत विरोध मोर्चा/ जुलूस निकाले, ज्ञापन दे |

२. प्रतिमा जी का सर मिलते ही टुकड़ो को पुनः जोड़कर मूल प्रतिमा जी पर लगाया जाना चाहिए चाहे इसके लिए कोई भी तकनीक प्रयोग में लानी पड़े | ये कार्य जैन समाज या जिला प्रशासन के स्तर पर होना चाहिए | इससे दोषियों को ये सन्देश जाएगा कि तुम्हारे कुकृत्यों से न तो हमारी आस्था प्रभावित होगी, न ही हम डरने वाले है, हम और भी सजग है अब | साथ ही ये सन्देश की तुम्हारे मंसूबे कभी सफल नहीं होने दिए जाएंगे |

३. सबसे महत्वपूर्ण बात - कब हम इस कुम्भकर्णी नींद से जागेंगे, कब हम होने प्राचीन धरोहरों का महत्व समझेंगे, कब हम अपनी धरोहरों का महत्व दूसरो को समझायेंगे , कब हम अपने क्षेत्रो की सुरक्षा पाबंद करेंगे, कब हम ऐसे उपेक्षित क्षेत्रो, और प्राचीन धरोहरों का भ्रमण करेंगे , कब हम अपनी दान राशि ऐसे क्षेत्रो को संरक्षित और सुरक्षित करने में लगाएंगे, कब हम समाज में फैले कर्मकांड, आडम्बर, दिखावा, भेड़चाल बंद करेंगे , कब हम नए मंदिरों के साथ साथ प्राचीन धरोहरों को भी सहेजेंगे ? कब ? उत्तर आपके ही पास है | अभी भी समय है जो भी बचा है उसे बचा लो उसे सुरक्षित कर लो |

४. इस क्षेत्र पर स्थित गुफा और प्राचीन शैल प्रतिमाओं की सुरक्षा के लिए जैन समाज या सरकार को एक दीवार बनाकर, रेलिंग लगाकर सुरक्षित करना चाहिए, वरना दोबारा ऐसा हो सकता है |

५. णमोकार महामंत्र की माला फेरे, जागते रहे, जगाते रहे- और अधिक क्या कहूँ, आप स्वयं समझदार है |

जय जिनेन्द्र

Team JainGlory

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Jain Temple @ Dinajpur, Bangladesh.
Jain images of this temple are shifted to Rajshahi and Dhaka museums.

Archaeological remains clearly testify that Jainism wa...s a living religion in present Bangladesh, too - during the early historic period. Alexander cunningham first discovered a Jain image at Mahasthangarh (Mahasthangad) in 1879 AD, which was later on moved to the Varendra Research Museum, in 1912. It is worth mentioning here that huen-tsang, the 7th century Chinese pilgrim found numerous Naked Jaina Monks in Pundravardhana (northern Bengal) and SAMANATATA (southeastern Bengal). The other well-known archaeological remains are kept in Bangladesh national museum, Rajshahi Museum etc.

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Today i was in Koti Sawargaon a suburb in Tuljapur Taluka of Osmanabad district, located near Sholapur. When i discussed regarding the basadi, the pandit told... some folktales and he said it was Hemadpanti temple but it is an Kalyani Chalukyan style roughly dates back to 12th century, the main sanctum has a sculpture of Parshavanatha with nine hooded serpent normally he has seven hooded but here is nine it was speciality of this temple another interesting thing is that on the roof inside sanctum there was an a beautiful sculpture of Neminatha Thirthankara which is carved in a single stone Thirthanka idol is in air only the corner is connected on the edge of the stone, very special.. This idol is brought from Malakhed by one Bhattaraka....

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http://www.prajavani.net/…/article_i…/2017/07/16/15shn01.jpg

Courtesy: Prajavani.net

More than 400 Years old Jain Basadi (Temple) @ Kallappanahalli hill, Hosur ...Village, Near Sanivarasanthe town (8 KM in west direction), Dist - Kodagu, Karnataka.

The temple is waiting for conservation. Please do the needful.

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prajavani.net
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14 Old Jain Images unearthed/found on April 29, 2017@ Village Arain, Near Ajmer, Dist - Ajmer, Rajasthan.

राजस्थान प्रान्त के अजमेर जिले में अरेन ग्राम में 29 ...अप्रैल २०१७ को एक मकान की नीव की खुदाई के दौरान १४ प्राचीन जैन प्रतिमाये प्राप्त हुई है, सभी जिन प्रतिमाओं को ग्राम के नज़दीक के ८ ग्रामो की जैन समाज पंचायत को प्रशासन द्वारा सुपुर्द कर दिया गया और प्रतिमाये अभी अरेन ग्राम के जैन मंदिर जी में है |

All images are handed over to Jains and are kept in the local Jain temple for worship.

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March 01/02, 2017 कौशांबी (Uttar Pradesh) में यमुना नदी से प्राचीन भगवान पार्श्वनाथ मूर्ति मिली है. प्रतिमा को फिलहाल पदमप्रभु मंदिर कौशांबी में रखवा दिया गया ह...ै. ग्राम प्रधान ने स्थानीय प्रशासन के साथ ही पुरातत्व विभाग को इसकी सूचना दी.

A 4.5 ft tall stone statue of 23rd Jain Teerthankar Parshavnathji believed to be about 1000-year-old was discovered by some fishermen from Yamuna in Kaushambi area (Uttar Pradesh) on March 01/02, 2017.

मूर्ति मिलने की सूचना पाकर ग्रामीणों की मौके पर भीड़ जुट गई. ग्राम प्रधान ने बताया कि कुछ ग्रामीण यमुना नदी में स्नान करने गए थे. नदी किनारे एक पत्थर पड़ा था जिसे कुछ लड़कों ने पलटा तो वे चकित रह गए. पत्थर पर एक मूर्ति बनी हुई थी. जबकि उसके ऊपर सात फनों वाले सांप की आकृति दिखाई दे रही थी. मूर्ति के नीचे आसन वाली जगह पर जानवरों की आकृति बनी हुई है. जानकारी पाकर जैन धर्म के इतिहास से जुड़े जानकार भी मौके पर पहुंचे.
मूर्ति भगवान पार्श्वनाथ जी की है. मूर्ति लगभग एक हजार साल पुरानी है.

The finding strengthens the fact that the region was a key centre for the Jains for ages.The statue has now been kept at a famous Padamprabh Jain temple in Kaushambi.

Sources said fishermen at Gurbuj Ghat in Gadhwa Kosam Inam village had cast net to catch fish on Wednesday. When they pulled out the net they discovered a large stone statue. Finding it of no use they left the statue at the ghat that was spotted by some villagers. The villagers informed the priest of Prabhashgiri Jain temple who identified the statute.

It is based on the seven-headed serpent (Sheshnag) and is about 3-ft wide and weighs around 4.50 quintals.

Reacting on the issue, historian Jain said Kaushambi was one of the most ancient Jain sites where sixth Jain Teerthankar was born. Mahaveer Swami had also meditated here. A story in Jain text ‘Avashyak Sutra’ mentions a Jain nun Chandanbala who was sold to a rich man of Kaushambi. She later provided food to Mahaveer Swami and became a nun.

Prof of Ancient History at Allahabad University DP Dubey said the statue may be of 12th century BC. Large number of members of Jain community once inhabited the Pali village in the area.

Director, Allahabad Museum Rajesh Purohit said Jain religion has an important place in history of Kaushambi. There is a small museum at Phabhosa village in the district where Jain statues belonging to 9th and 10th centuries are kept. There may be a temple of Parshavnath on the banks of Yamuna from where the statue was immersed in the river.

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