जैन ललित (Jain Lalit Muthaliya) is on Facebook.
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About ललित
  • स्नेही स्वजनों...
    मेरे शब्द... मेरे बोलने तक ही मेरे है...
    उसके बाद... तुम इसका क्या करते हो...
    इसकी ज़िम्मेवारी तुम्हारी है... !!
    __/\__
    जो जिस भाषा को समझता...
    उसे उसी भाषा मे समझाना पड़ता हे... !!
Favorite Quotes
  • “ मक्कारी और फ़रेब ”

    धोखेबाजी...
    और फ़िर ज़ालसाज़ी ही...
    पसंद अज़ब दुनियां को…

    हो कर रहेगा...
    गज़ब कुछ न कुछ...
    ईमानदारी पे चले चल…

    तोहमद-ए लाख ही लगायें...
    तुझपे बाशिंदे क़रीबी दुनियाँ के…

    मालुम है ये... बे-शक़...
    सच डरता नहीं... बे-गैरत ढ़खोंसलों से...

    उठा तो सकते है...
    उंगलियाँ हम भी कई इक़… तुझ पे…

    पर ए-सितमग़र...
    तेरी नाराज़गियों का हिसाब कौन रखेगा ???

    ” ललित जैन ”

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    रिश्तों की दीवार...
    '' ये दीवार टूटती क्यों नहीं '' .... ???

    अरे भई....
    ये प्यार व्यार कुछ नहीं, सब मतलब का खेल है...

    सिर्फ और सिर्फ अपनी सहूलियत से...
    झूट और फरेब के बिच... अपनी सोचते हुए ही ये खेल खेला जाता है...
    जिसमे दुसरे के जज्बातों से भरे सच्चे दिल की.... कोई अहमियत नहीं होती...

    झूट का बे-इन्तहां तड़का लगा लगा के... उसे बे-स्वाद ही किया जाता है...
    बिना सोचे की... कोई सब जानते पहचानते हुए भी... उसका स्वाद लिए जा रहा है...

    कडवे शब्दों का लगातार...
    उपर से निम्बू बे-इन्तहां निचोड़ा जाता है...
    जैसे किसी के दिल में जुबाँ न हो...
    और वो... उस कडवाहट के जहर का... स्वाद समझ व जान ही न पा रहा हो...

    और फिर भी....
    हिमाकत ये देखो...
    कडवाहट के बरछी भाले लिये... सामने खड़ा हो जाता है....

    ” ललित जैन ”

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