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Favorite Quotes
  • 1.
    विचार लो कि मत्र्य हो न मृत्यु से डरो कभी¸
    मरो परन्तु यों मरो कि याद जो करे सभी |
    हुई न यों सु–मृत्यु तो वृथा मरे¸ वृथा जिये¸
    नहीं वहीं कि जो जिया न आपके लिए |
    यही पशु–प्रवृत्ति है कि आप आप ही चरे¸
    वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे ||
    -- मैथिलीशरण गुप्त

    2.
    क्षमा शोभती उस भुजंग को
    जिसके पास गरल हो
    उसको क्या जो दंतहीन
    विषरहित, विनीत, सरल हो |
    -- रामधारी सिंह "दिनकर"

    3.
    बैठ जाता हूं मिट्टी पे अक्सर...
    क्योंकि मुझे अपनी औकात अच्छी लगती है..

    मैंने समंदर से सीखा है जीने का सलीक़ा,
    चुपचाप से बहना और अपनी मौज में रहना ||

    ऐसा नहीं है कि मुझमें कोई ऐब नहीं है पर सच कहता हूँ मुझमे कोई फरेब नहीं है |
    जल जाते हैं मेरे अंदाज़ से मेरे दुश्मन क्यूंकि एक मुद्दत से मैंने
    न मोहब्बत बदली और न दोस्त बदले ||
    -- हरिवंश राय बच्चन

    4.
    यो न हृष्यति न द्वेष्टि न शोचति न काङ्क्षति |
    शुभाशुभपरित्यागी भक्तिमान्यः स मे प्रियः ||

    समः शत्रौ च मित्रे च तथा मानापमानयोः |
    शीतोष्णसुखदुःखेषु समः सङ्गविवर्जितः ||

    -- अध्याय - १२, श्रीमद्भगवद्गीता

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